1 प्रकृति खेती और जैविक खेती किसे कहते हे
प्राकृतिक खेती ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें परम्परागत बीज और स्थानीय संसाधनों जैसे देशी गाय का गोबर, गोमूत्र, जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, मल्चिंग का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन बढ़ाया जाता है।
जैविक खेती में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता, लेकिन वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद, हरी खाद, जैव उर्वरक कल्चर डाला जाता हे तथा अनुमोदित जैविक आदानों का उपयोग किया जाता है।
2 प्राकृतिक खेती प्रमाणीकरण से लाभ क्या हे
प्राकृतिक खेती से शॉर्ट टर्म (Short Term) एवं लॉन्ग टर्म (Long Term) लाभ
1. शॉर्ट टर्म लाभ (0–3 वर्ष)
आर्थिक लाभ
- रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों पर होने वाला खर्च 40–80% तक कम हो सकता है।
- स्थानीय संसाधनों (गोबर, गोमूत्र, जीवामृत आदि) के उपयोग से खेती की लागत घटती है।
- किसानों की नकद निवेश की आवश्यकता कम होती है।
मिट्टी एवं फसल
- मिट्टी में केंचुओं और सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ने लगती है।
- मिट्टी की नमी अधिक समय तक बनी रहती है।
- पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं।
- फसलों में रोग एवं कीटों का प्रकोप धीरे-धीरे कम होने लगता है।
स्वास्थ्य
- रसायन-मुक्त उत्पादन प्रारंभ होता है।
- किसान और खेतिहर मजदूर हानिकारक रसायनों के संपर्क से बचते हैं।
सामाजिक लाभ
- किसान आत्मनिर्भर बनता है।
- गांव में प्राकृतिक आदानों के निर्माण से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
2. लॉन्ग टर्म लाभ (3–10 वर्ष एवं उससे अधिक)
मिट्टी का स्वास्थ्य
- मिट्टी में जैविक कार्बन (Organic Carbon) बढ़ता है।
- मिट्टी की उर्वरता एवं संरचना स्थायी रूप से सुधरती है।
- लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
जल संरक्षण
- सिंचाई की आवश्यकता कम होती है।
- वर्षा जल का बेहतर संरक्षण होता है।
- भूजल स्तर सुधारने में सहायता मिलती है।
उत्पादन
- प्रारंभिक परिवर्तन काल के बाद उत्पादन स्थिर एवं टिकाऊ हो जाता है।
- प्राकृतिक आपदाओं (सूखा, अधिक वर्षा, गर्मी) के प्रति फसल की सहनशीलता बढ़ती है।
आर्थिक लाभ
- खेती की लागत लगातार कम बनी रहती है।
- प्राकृतिक एवं प्रमाणित उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है।
- किसानों की आय अधिक स्थिर होती है।
पर्यावरणीय लाभ
- मिट्टी, जल एवं वायु प्रदूषण कम होता है।
- जैव विविधता (पक्षी, मधुमक्खी, तितली, केंचुए आदि) बढ़ती है।
- ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है।
स्वास्थ्य लाभ
- उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं रसायन-मुक्त भोजन मिलता है।
- किसानों के स्वास्थ्य पर रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव कम होते हैं।
3 प्राकृतिक खेती का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए क्या जानकारी किसान को देना होता हे
| जानकारी | यहाँ लिखे | |
| 1 | किसान का नाम | |
| 2 | पिता का नाम | |
| 3 | जिला | |
| 4 | ब्लोक | |
| 5 | ग्राम | |
| 6 | पिनकोड | |
| 7 | किसान की जाती /वर्ग | |
| 8 | किसान की उम्र | |
| 9 | Mobail number | |
| 10 | email id | |
| 11 | खसरा नंबर | |
| 12 | कुल जमीन का रकवा | |
| 13 | नेचुरल फॉर्मिंग रकवा |
4 कलस्टर में कैसे सम्मिलित हो सकते हे
प्राकृतिक खेती में सामान्यतः 20 से 50 किसानों का एक समूह (क्लस्टर) बनाया जाता है।
सम्मिलित होने की प्रक्रिया अपने क्षेत्र के कृषि विभाग, ATMA, KVK या NGO से संपर्क करें।
क्लस्टर सदस्यता फॉर्म भरें।
समूह के नियमों का पालन करने की सहमति दें।
प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प पत्र दें।
नियमित बैठक एवं निरीक्षण में भाग लें।
क्लस्टर के लाभ
प्रशिक्षण सुविधा
सामूहिक प्रमाणीकरण
बाजार संपर्क
तकनीकी मार्गदर्शन
दस्तावेजीकरण में सहायता
5 पियर एप्राइसल क्या होता हे इसको कितने किसान ओर कैसे करता हे उत्पादन कितना निकलेगा कौन बताएगा
Peer Appraisal का अर्थ है “सह मूल्यांकन”।
इसमें एक ही क्लस्टर के किसान दूसरे किसानों के खेत का निरीक्षण करते हैं और यह देखते हैं कि प्राकृतिक खेती के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
कितने किसान निरीक्षण करते हैं? 3 से 6 प्रशिक्षित किसान
निरीक्षण में क्या देखा जाता है?
खेत की स्थिति
फसल की स्थिति
जीवामृत एवं अन्य आदानों का उपयोग
रासायनिक उर्वरकों का उपयोग तो नहीं हुआ
रिकॉर्ड रजिस्टर
बफर जोन (पड़ोसी खेत से सुरक्षा)
उत्पादन कितना निकलेगा, कौन बताएगा?
पियर टीम उत्पादन तय करती हे ।
उत्पादन का अनुमान निम्न आधार पर लगाया जाता है:
फसल का क्षेत्रफल
फसल की स्थिति
पिछले वर्षों का रिकॉर्ड
कटाई के समय किसान द्वारा प्रस्तुत जानकारी
अंतिम उत्पादन रिकॉर्ड किसान स्वयं रखता है, जिसे समूह सत्यापित करता है।
6 मीटिंग में क्या बताया जाता हे
प्राक्रतिक खेती में क्या करना हे और क्या नही करना हे Do and Dont बताये
7 ट्रेनिंग में क्या बताया जाता हे
प्राक्रतिक खेती में क्या क्या डाला जाता हे जीवामृत घन जीवामृत कितना डाला जाता हे कब डाला जाता हे बाते जाता हे